Hindustanmailnews

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पीएम ने किया वाइब्रेंट गुजरात समिट का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधीनगर में वाइब्रेंट गुजरात समिट के 10वें एडिशन का उद्घाटन किया। वअए के प्रेसीडेंट मोहम्मद बिन जायद कई अन्य वर्ल्ड लीडर्स और इंडस्ट्री लीडर्स के साथ चीफ गेस्ट के रूप में इस कार्यक्रम में शामिल हैं, वहीं मुकेश अंबानी, पंकज पटेल, गौतम अडाणी और लक्ष्मी मित्तल समेत देश-विदेश के दिग्गज कारोबारी समिट में मौजूद हैं।
यहां पर ट्रेड शो का भी आयोजन किया गया है। ट्रेड शो का उद्घाटन मंगलवार को पीएम मोदी ने किया था। इसमें 20 देशों के 1,000 से अधिक एग्जिबिटर्स शामिल हुए हैं। 34 देश पार्टनर के रूप में भाग ले रहे हैं, जबकि लगभग 100 देश विजिटिंग ट्रेड शो के रूप में भाग ले रहे हैं।
ट्रेड शो 10-11 जनवरी को बिजनेस विजिटर्स के लिए और 12-13 जनवरी को जनता के लिए खुला रहेगा। आयोजन स्थल में विभिन्न विषयों पर आधारित 13 हॉल है – जिनमें ‘मेक इन गुजरात’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ शामिल हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने मंगलवार शाम को अहमदाबाद में रोड-शो किया था। करीब 3 किमी लंबा यह रोड-शो एयरपोर्ट से साबरमती आश्रम तक हुआ। करीब 20 मिनट तक साबरमती आश्रम में रुकने के बाद शाम 7 बजे दोनों के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई।

रामबाण रूपी ब्रह्मास्त्र से मोदी जीतेंगे जंग?

देखा जाए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राम की नगरी अयोध्या से लोकसभा चुनाव-2024 का शंखनाद कर दिया है। हजारों करोड़ की विकास योजनाओं का लोकार्पण के बाद मोदी ने यूपी ही नहीं, बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र से लेकर पूरे भारतीयों या यूं कहे हर तबके को साधा। एक तरफ उन्होंने महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट के जरिए वाल्मीकि समाज को रिझाया तो दूसरी तरफ मीरा मांझी के घर पहुंचकर रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का आमंत्रण देकर उन्होंने दलित और निषाद समाज को साधने का बड़ा दांव खेल दिया। उन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस को अयोध्या की धरती से याद किया, वहीं स्वर कोकिला लता मंगेशकर के जरिए महाराष्ट्र की राजनीति को भी साधने की कोशिश की। अमृत भारत एक्सप्रेस के जरिए बिहार के लोगों को संदेश दिया कि विकास हम ही करेंगे। खास यह है कि मोदी ने विकास योजनाओं के साथ- साथ लोगों का आह्वान किया कि वे अपनी ऐतिहासिक विरासत को भी संजाने-संवारने के लिए आगे आएं। रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा की तिथि 22 जनवरी को उत्सुकता का प्रदर्शन करते हुए श्रीराम ज्योति इस कदर जलाएं, मानों सचमुच मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का अवतरण आज ही हुआ है। मतलब साफ है मोदी ने राम की धरती से चुनावी बिगुल फूंकते हुए ‘रामबाण’ रुपी ‘ब्रह्मास्त्र’ चलाकर 2024 की जंग जीतने का ऐलान कर दिया है। बाजी किसके हाथ लगेगी… ये तो चुनाव परिणाम बताएंगे, लेकिन लोकसभा चुनाव-2024 से पहले पीएम मोदी ने अयोध्या के मंच से धर्म के साथ विकास की राजनीतिक एजेंडा सेट कर दिया है। विरासत को विकास के लिए जरूरी बताकर एक बड़ा संदेश दिया है।
फिलहाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी निर्माणाधीन भव्य राम मंदिर में भगवान राम के बालस्वरूप मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले अयोध्या पहुंचकर पहले रोड-शो किया, फिर अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन का उद्घाटन भी किया… या यूं कहें पीएम नरेंद्र मोदी रामनगरी में रोड-शो करने वाले पहले प्रधानमंत्री बने। पीएम का रोड-शो अद्भुत, अविश्वसनीय व अकल्पनीय रहा..। अद्भुत इसलिए रहा कि पीएम मोदी का स्वागत करने के लिए अयोध्या समेत पूरे देश की संस्कृति उमड़ पड़ी। अविश्वसनीय व अकल्पनीय इसलिए रहा कि आज से पहले कोई कल्पना नहीं कर सकता था कि कोई प्रधानमंत्री अयोध्या में रोड-शो करेगा। अयोध्या में रोड-शो के जरिए पीएम नरेंद्र मोदी पूरे देश के दिल में उतर गए। बारी जब लोगों को संबोधन की आई तो यह कहने में संकोच नहीं किया कि आज देश में सिर्फ बाबा विश्वनाथ धाम, महाकाल महालोक व केदार धाम का पुनरुद्धार ही नहीं हुआ है, बल्कि 315 से ज्यादा नए मेडिकल कॉलेज भी बने हैं। हर घर जल पहुंचाने के लिए पानी की 2 लाख से ज्यादा टंकियां भी बनवाई गई हैं। पीएम नरेंद्र मोदी इसके बाद अयोध्या के नवनिर्मित महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करने पहुंचे। उद्घाटन समारोह को लेकर तैयारी पहले से पूरी की गई थी। महर्षि वाल्मीकि के नाम पर एयरपोर्ट का उद्घाटन और उससे पहले निषाद राज को प्रभु रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा में आमंत्रण को लेकर एक अलग ही राजनीतिक लाइन पर काम किए जाने की चर्चा शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी दलित पॉलिटिक्स पर लगातार काम करती दिखी है। यूपी चुनाव 2022 के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ को दोबारा सत्ता में लाने में दलित वोट बैंक का बड़ा योगदान था।
पीएम नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जिक्र अयोध्या के मंच से किया। उन्होंने कहा कि आज के ही दिन 30 दिसंबर, 1943 को नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने अंडमान जेल में देश की आजादी का झंडा फहराया था। उसके आजाद भारत के विकसित होने के संकल्प को हमारी सरकार पूरा करने में जुटी हुई है। दरअसल, पश्चिम बंगाल में भाजपा को तृणमूल कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिलती दिख रही है। भगवान श्रीराम के अयोध्या मंदिर में विराजमान होने को लेकर पीएम मोदी से नेताजी को याद कर साधने की कोशिश की। पीएम नरेंद्र मोदी ने लता मंगेशकर को याद कर महाराष्ट्र की जनता को बड़ा संदेश देने का प्रयास किया। पीएम नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र में पार्टी की स्थिति को मजबूत बनाने का प्रयास करते दिखे। दरअसल, महाविकास अघाड़ी सरकार के विघटन के बाद से महाराष्ट्र की सत्ता में भाजपा की वापसी तो हुई है, लेकिन उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसे नेताओं के विरोध के कारण पार्टी को कुछ नुकसान होने की आशंका दिख रही है। ऐसे में हिंदुत्व के संकेत अयोध्या से महाराष्ट्र को देने की कोशिश की गई। दरभंगा- अयोध्या- आनंद विहार अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन के जरिए अयोध्या के मंच से बिहार का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि बिहार के लोग अब आसानी से अयोध्या धाम आ सकते हैं। उन्हें बेहतर सुविधाओं वाली ट्रेन की सुविधा दी गई है। इससे लोगों को काफी फायदा मिलेगा। इसके अलावा लोगों को काफी फायदा मिल जाएगा। इसके अलावा उन्होंने बोधगया के बौद्ध धर्मावलंबियों के आगमन का भी जिक्र किया। बिहार में राजद और जद-यू के गठबंधन के बाद भाजपा की परेशानी बढ़ने की बात कही जा रही है। ऐसे में पीएम नरेंद्र मोदी की इस चर्चा को अलग प्रकार की राजनीति से देखा जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी देश के लोगों को प्रभु रामलला के आगमन के मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने श्रीराम ज्योति जलाने का आह्वान किया। इस प्रकार के आह्वान के जरिए उन्होंने दीपोत्सव का एक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान राम के 550 वर्षों के बाद आगमन के मौके पर देश के लोग उत्सव मनाएं। यह एक खुशियों का मौका है। यह हमारी विरासत का महापर्व है। इस प्रकार के संदेश के जरिए पीएम मोदी ने देश को एक बार फिर एक सूत्र में बांधने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभु रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को लेकर लोगों से बड़ा अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि 550 सालों तक हमने इंतजार किया। कुछ दिनों तक और इंतजार कर लें। 22 जनवरी को देश के सभी लोग प्रभु राम के धाम में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। यह संभव नहीं है। कुछ दिन बाद आप भगवान श्रीराम का दर्शन करने अयोध्या आ सकते हैं। उनके भव्य मंदिर का दर्शन कर सकते हैं। 22 जनवरी को यहां आकर आप परेशान न हों। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले तीन-चार सालों से अयोध्या के लोग राम मंदिर के काम में जुटे हुए हैं। उन्हें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि अयोध्या रामलला के मंदिर के उद्घाटन समारोह को लेकर कुछ लोगों को निमंत्रण दिया गया है। उनको किसी प्रकार की सुविधा न हो, इसका भी ध्यान हमें रखना है। अयोध्या के लोगों को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि यहां पर बड़ी संख्या में लोग आने वाले हैं। यहां आने वाले लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि होगी। इसके लिए अयोध्यावासियों को एक संकल्प लेना है। वह संकल्प है अयोध्या नगर को देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाना। यह अयोध्यावासियों की जिम्मेदारी है, यह हमें मिलकर हर कदम उठाना है। पीएम मोदी ने देश के सभी तीर्थ क्षेत्र और मंदिरों से आग्रह किया रामलला के आगमन के एक सप्ताह पहले यानि 14 जनवरी से विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाए।

नीतीश कुमार बनेंगे कठऊकअ के संयोजक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के विजयी रथ को रोकने के लिए तैयार विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के घटक दलों के बीच लोकसभा चुनावों के लिए सीट बंटवारे पर बातचीत चल रही है। बुधवार को एक वर्चुअल बैठक होने की उम्मीद है, जिसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को गठबंधन का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया सकता है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को इंडिया गठबंधन का अध्यक्ष या चेयरपर्सन नियुक्त किए जाने की भी चर्चा है। इसके साथ ही सूत्रों ने यह भी कहा कि इन दिनों आरजेडी पर लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव कराने के लिए दबाव बना रहे हैं।
इंडियन एक्सप्रेस ने नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड), कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और बिहार में वामपंथी दलों के सूत्रों के हवाले से बताया है कि कांग्रेस अब जेडीयू को गठबंधन में बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय संयोजक का पद छोड़ने के लिए तैयार है। एक कांग्रेस नेता ने कहा, राहुल गांधी एक महत्वपूर्ण यात्रा पर निकल रहे हैं, हम यात्रा की गति को जारी रखना चाहते हैं। अगर नीतीश कुमार भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में चले जाते हैं तो विपक्ष को एकजुट करने का प्रयास विफल हो जाएगा। इंडिया गठबंधन के अधिकांश सदस्य इस बात से चिंतित हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष या चेयरपर्सन का पद खड़गे के पास रखकर गठबंधन में अग्रणी पार्टी के रूप में अपनी प्रधानता बनाए रखेगी।

वढ से पहले टढ में ही कांग्रेस और अखिलेश में मचा क्लेश, ‘आप’ का भी अलग राग

मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष के 28 दलों वाले इंडिया गठबंधन की एकता को लेकर एक बार फिर कई सवाल खड़े हो गए हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ समेत पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को गठबंधन के साथियों से भी मुकाबला करना होगा। मध्यप्रदेश में आम आदमी पार्टी जहां पहले ही सभी 200 सीटों पर अकेले लड़ने का ऐलान कर चुकी है तो अब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में गठबंधन की संभावनाएं भी खत्म हो गई हैं।
दोनों दलों के बीच गठबंधन और शीट शेयरिंग को लेकर बातचीत भी हुई, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। रविवार को जब कांग्रेस ने 144 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान किया तो यह भी साफ हो गया कि सपा के साथ गठबंधन की सभी उम्मीदें अब खत्म हो गई हैं। कांग्रेस ने उन 7 में से 4 सीट पर उम्मीदवार का ऐलान कर दिया, जिन पर सपा पहले ही प्रत्याशी की घोषणा कर चुकी थी। सपा को सबसे बड़ा झटका छतरपुर के बिजावर सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार का नाम देखकर लगा, जिस पर 2018 में उसे जीत मिली थी। हालांकि, सपा ने अभी यहां उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है। शाम को अखिलेश की पार्टी ने 9 और उम्मीदवारों की एक सूची जारी की।

दीदी की जगह दीदी को लाने की रणनीति!

भाजपा महू में दीदी की जगह दीदी को लाने की रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों के अनुसार यदि कैलाश विजयवर्गीय उषा ठाकुर के नाम पर तीन नंबर के लिए सहमत हुए तो राज्यसभा सदस्य कविता पाटीदार महू से और उषा ठाकुर तीन से लड़ सकती हैं। इस रणनीति के चलते इंदौर जिले में भाजपा तीन महिलाओं और तीन ओबीसी वर्ग को टिकट देने की स्थिति में आ जाएगी।
दरअसल, भाजपा की चौथी सूची आने के बाद कांग्रेस की पहली सूची को लेकर अटकलें हैं। कमलनाथ ने कल पत्रकारों के समक्ष स्पष्ट किया कि कांग्रेस की पहली सूची 15 अक्टूबर तक आएगी। इसी दिन नवदुर्गा उत्सव आरंभ होगा। भाजपा अपने इंदौर जिले के बचे हुए तीन प्रत्याशियों को कांग्रेस की पहली सूची आने के बाद घोषित कर सकती है। पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा की पांचवीं सूची 20 अक्टूबर तक आने की संभावना है। कांग्रेस की सूची में तीनों मौजूदा विधायक यानि संजय शुक्ला, जीतू पटवारी और विशाल पटेल के नाम होंगे। इनके अलावा कांग्रेस सांवेर से रीना सेतिया और क्षेत्र क्रमांक 5 से सत्यनारायण पटेल का नाम भी तय बताया जा रहा है। शेष चार सीटों पर दो-दो, तीन-तीन उम्मीदवारों के पैनल हैं, इसलिए यहां के फैसले बाद में हो सकते हैं। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 2 नवंबर नाम वापसी की अंतिम तिथि है। जाहिर है, कांग्रेस और भाजपा को इसके पूर्व टिकट वितरण करना पड़ेगा। भाजपा के टिकट वितरण में जो भूमिका केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने निभाई, वही भूमिका कांग्रेस के लिए कमलनाथ और दिग्विजय सिंह निभाने वाले हैं। सूत्रों का कहना है कि भाजपा इस बार जिले से तीन महिलाओं और तीन पिछड़े वर्ग के प्रत्याशी खड़े करने का प्रयोग करने की कोशिश कर रही है, इसलिए पार्टी चाहती है कि उषा ठाकुर को क्षेत्र क्रमांक तीन में शिफ्ट किया जाए, ताकि महू से कविता पाटीदार को उतारा जा सके। भाजपा ने क्षेत्र क्रमांक चार से मालिनी गौड़ को टिकट दिया है। इस तरह से पार्टी तीन महिलाओं को उतार सकेगी। इसी तरह भाजपा ने मनोज पटेल और मधु वर्मा के रूप में 2 ओबीसी उम्मीदवार दिए हैं। यदि कविता पाटीदार और महेंद्र हार्डिया में से किसी एक को टिकट मिलता है तो जिले से पहली बार भाजपा 3 ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार उतार सकेगी। कांग्रेस की सूची में हर बार की तरह इस बार भी दो ब्राह्मण उम्मीदवार होंगे। क्षेत्र क्रमांक एक से संजय शुक्ला का नाम तय है। तीन नंबर से अश्विन जोशी या पिंटू जोशी में से कोई उम्मीदवार होगा। इसके अलावा महू विधानसभा क्षेत्र से भी कैलाश पांडे और रामकिशोर शुक्ला टिकट मांग रहे हैं। सूत्रों के अनुसार आने वाले 2 दिनों में कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक दिल्ली में हो रही है, जिसमें मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की सीटों पर निर्णय होंगे। दरअसल, क्षेत्र क्रमांक 3 में कैलाश विजयवर्गीय की सहमति इसलिए जरूरी है, क्योंकि विधायक रहते आकाश विजयवर्गीय ने जबर्दस्त सक्रियता दिखाई है। उन्होंने क्षेत्र क्रमांक तीन में करीब 2000 करोड़ के विकास कार्य करवाए। इसके अलावा कोरोना संक्रमण के समय उन्होंने क्षेत्र के लगभग 40,000 परिवारों को नियमित रूप से राशन किट दिए। कोरोना के समय मरीजों को मुफ्त इलाज के मामले में भी आकाश विजयवर्गीय अपने यशस्वी पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए आगे रहे। आकाश विजयवर्गीय की सक्रियता का ही परिणाम है कि इंदौर के नगर निगम चुनाव में क्षेत्र क्रमांक 3 में भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले अधिक पार्षद और मेयर के चुनाव में 5000 से अधिक की बढ़त मिली, जबकि नगर निगम चुनाव में हमेशा यह क्षेत्र कांग्रेस के पक्ष में रहा है। जाहिर है, यदि कैलाश विजयवर्गीय खेमे की सहमति के बिना उषा ठाकुर को क्षेत्र क्रमांक तीन में भेजा गया तो उनकी जीत की संभावना कम हो जाएगी। इसी वजह से क्षेत्र क्रमांक का तीन के उम्मीदवार के मामले में भाजपा कैलाश विजयवर्गीय से चर्चा करके टिकट देना चाहती है। एक दिलचस्प तथ्य यह है कि कैलाश विजयवर्गीय की उंगली पकड़कर राजनीति करने वाले गौरव रणदिवे के नाम पर आकाश विजयवर्गीय और उनके समर्थक तीन नंबर के लिए राजी नहीं हैं।
एक रणनीति यह भी हो सकती है कि कैलाश विजयवर्गीय क्षेत्र क्रमांक 3 के लिए सुदर्शन गुप्ता की सिफारिश करें, जिससे क्षेत्र क्रमांक एक में भाजपा को और मजबूती मिले। ऐसा होने से सुदर्शन गुप्ता के समर्थक या तो क्षेत्र क्रमांक एक में कैलाश विजयवर्गीय के लिए काम करेंगे या फिर सुदर्शन गुप्ता के लिए तीन में लगेंगे। जहां तक महू का सवाल है तो भाजपा के संदर्भ में टिकट की दौड़ फिलहाल उषा ठाकुर और कविता पाटीदार तक सीमित हो गई है।

Scroll to Top
Verified by MonsterInsights